नवरात्र के नौवें दिन ऐसे करें पूजा

ऐसे करें पूजा
माता के नौवें रूप सिद्धिदात्री की भी पूजा मां के अन्‍य रूपों की तरह ही की जाती है, लेकिन इनकी पूजा में नवाह्न प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ किस्म के फूल और नौ प्रकार के फल अर्पित करने चाहिए. पूजा में सबसे पहले कलश और उसमें मौजूद देवी देवताओं की पूजा करें. इसके बाद माता के मंत्र का जाप करें.

मां सिद्धिदात्री का मंत्र
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।
नवमी के दिन नौ कन्‍याओं को कराएं भोजन
नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद नौ कन्‍याओं को भोजन कराना चाहिए. कहा जाता है कि छोटी कन्‍याओं में मां का वास होता है, इसलिए नवमी के दिन उनकी पूजा की जाती है और भोजन कराया जाता है.

एक दिन है अष्‍टमी और नवमी तिथि
चैत्र नवरात्र की अष्‍टमी और नवमी तिथि एक दिन यानि 4 अप्रैल को है. सुबह 10:10 बजे अष्‍टमी तिथि के खत्‍म होने के बाद नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी. दोनों तिथियां एक साथ होने से मां के आठवें और नौवें स्‍वरूप की पूजा भी एक साथ ही किया जाना चाहिए. इसके साथ ही भगवना श्रीराम की जन्‍मतिथि भी इसी दिन है, तो इसके साथ राम नवमी भी मनाई जाएगी.

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अष्टमी पर करें माँ महागौरी की उपासना, विवाह अौर हर बाधा का होगा समाधान

माँ महागौरी अष्टमी के दिन मां को नारियल का भोग लगाएं. नारियल को सिर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें. मान्यता है कि ऐसा करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होगी.

 

नवदुर्गा का आठवां स्वरूप महागौरी है। अष्टमी को माता गौरी की पूजा की जाती है। महागौरी की अराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक कुंवारी कन्याअों को भोजन करवाने का विधान है लेकिन अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है। इस दिन मां को चुनरी भेट करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठोर पूजा की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने इन्हें स्वीकार किया और गंगा जल की धार जैसे ही देवी पर पड़ी देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो गईं और उन्हें मां गौरी नाम मिला। माना जाता है कि माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए महागौरी की पूजा की थी। महागौरी श्वेत वर्ण की हैं और सफेद रंग मैं इनका ध्यान करना बहुत लाभकारी होता है। विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है। मां महागौरी की चार भुजाएं हैं। माता वृषभ पर विराजमान हैं। इनकी उपासना से मां महागौरी साधक को अलौलिक शक्ति प्रदान करती हैं।

सुशील वर की प्राप्ति के लिए करें इस मंत्र का जाप
नवरात्रि के अष्टमी को सुबह स्नानदि कार्यों से निवृत होकर कुवांरी कन्याएं मां गौरी के ‘या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।’ मंत्र का जाप करें। इससे सुंदर व सुशील वर की प्राप्ति होती है। कन्याएं मां गौरी के मंदिर में जाकर पहले जल व फूल अफित करें उसके बाद इस मंत्र का 3 बार जाप करें तो उन्हें शीघ्र अच्छे वर की प्राप्ति होगी।

कुडंली दोष होते हैं दूर
नवरात्रि पर मां महागौरी की उपासना करने से कुंडली में विवाह संबंधी परेशानियां दूर होती हैं अौर मनवांछित वर की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही शीघ्र विवाह होता है।

सभी मनोकामनाएं होगी पूर्ण
अष्टमी के दिन मां को नारियल का भोग लगाएं। इस दिन नारियल को सिर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

बीमारियों से मिलेगी मुक्ति
मां महागौरी की पूजा से मधुमेह अौर आंखों की हर समस्या से छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही हर तरह बाधाएं दूर होती हैं।

धन प्राप्ति के लिए करें ये उपाय
महागौरी को दूध से भरी कटोरी में रखकर चांदी का सिक्का अर्पित करें। इसके बाद मां से धन के बने रहने की प्रार्थना करें। सिक्के को धोकर हमेशा के लिए अपने पास रख लें।

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नवरात्रि सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, होगा दुष्टों का नाश

मां कालरात्रि सप्तमी तिथि के दिन भगवती की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके ब्राह्मण को दे देना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति शोकमुक्त होता है.

 

नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की उपासना का विधान है। माता का स्वरूप काला होने के कारण इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। दैत्यराज रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से माता कालरात्रि को उत्पन्न किया था। मां का स्वरूप भयानक है लेकिन इनकी पूजा सदैव शुभ फल प्रदान करती है। इसी कारण इनका नाम ‘शुभंकारी’ भी है।

माता कालरात्रि की पूजा करने से व्यक्ति को समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही दुष्टों का नाश अौर ग्रह बाधाएं दूर हो जाती हैं। इनके उपासकों को अग्नि, जल, जंतु, शत्रु, रात्रि भय आदि कभी नहीं होते। इनकी कृपा से वह सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है। माता कालरात्रि का स्वरूप बहुत भयानक है। मां के सिर के बाल बिखरे हुए अौर गले में विद्युत की माला है। माता के त्रिनेत्र हैं। मां की नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएं निकलती रहती हैं। इनका वाहन गर्दभ है। इनके चार हाथ हैं। जिसमें इन्होंने ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वरमुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं। दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है। नवरात्रि पर इस मंत्र का जाप कर मां कालरात्रि प्रसन्न हो भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती है।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

कथा के अनुसार दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था। इससे चिंतित होकर सभी देवतागण भोलेनाथ के पास गए। भगवान शिव जी ने देवी पार्वती से राक्षसों का वध कर अपने भक्तों की रक्षा करने को कहा। भोलेनाथ की बात मानकर पार्वती जी ने दुर्गा का स्वरूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया। परंतु जैसे ही दुर्गा माता ने रक्तबीज को मारा उसके शरीर से निकले रक्त से लाखों रक्तबीज उत्पन्न हो गए। इसे देख दुर्गा माता ने अपने तेज से कालरात्रि को उत्पन्न किया। इसके बाद जब मां दुर्गा ने रक्तबीज को मारा तो उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को कालरात्रि ने अपने मुख में भर लिया और सबका गला काटते हुए रक्तबीज का वध कर दिया।

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नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है

मां कात्यायनी षष्ठी तिथि के दिन देवी के पूजन में मधु का महत्व बताया गया है. इस दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिए. इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप प्राप्त करता है.

विवाह योग के लिए करें मां कात्यायनी की पूजा.

 

 

नवरात्रि की पंचमी तिथि को मां स्कंदमाता की पूजा होती हैं

मां स्कंदमाता पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है.

नवरात्र में चतुर्थ दिन होती है माँ कूष्मांडा की पूजा

मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं. इसके बाद प्रसाद को किसी ब्राह्मण को दान कर दें और खुद भी खाएं. इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी अच्छी हो जाएगी.

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नवरात्रि के आठवें दिन करे माता महागौरी की आराधना – Navratri 2016

माता महागौरी की जय हो 

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नवरात्रि के आठवे दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गौरा है इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है।

नवरात्रि का आठवां दिन हमारे शरीर का सोम चक्र जागृत करने का दिन है। सोम चक्र उध्र्व ललाट में स्थित होता है। आठवें दिन साधना करते हुए अपना ध्यान इसी चक्र पर लगाना चाहिए। श्री महागौरी की आराधना से सोम चक्र जागृत हो जाता है और इस चक्र से संबंधित सभी शक्तियां श्रद्धालु को प्राप्त हो जाती है। मां महागौरी के प्रसन्न होने पर भक्तों को सभी सुख स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही इनकी भक्ति से हमें मन की शांति भी मिलती है।

उपाय- अष्टमी तिथि के दिन माता दुर्गा को नारियल का भोग लगाएं तथा नारियल का दान भी करें। इससे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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