जाने पंडित कपिल शर्मा जी से हस्तरेखाओं में किस रेखा को अहम माना जाता है।

हस्त रेखाओं में भाग्य रेखा को सबसे अहम माना जाता है।

कहां होती है भाग्य रेखा ? : भाग्य रेखा हृदय रेखा के मध्य से शुरु होकर मणिबन्ध तक जाती है। इस रेखा का उद्गम अधिकतर मध्यमा या शनि पर्वत से होता है।
सीधे शब्दों में समझें तो जो रेखा मध्यमा यानि पंजे की बीच वाली लंबी उंगुली के नीचे से शुरु होकर ऊपर तक जाती है उसे ही भाग्य रेखा कहते हैं। कई जातकों के हाथों में यह मणिबंध यानि कलाई की रेखाओं तक भी जाती है। FREE ASTROLOGY ADVICE

vashikaran GURU

भाग्य रेखा का फल : सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार जिस जातक के हाथों में भाग्यरेखा जितनी अधिक गहरी और लंबी होती है उसका भाग्य उतना अधिक अच्छा होता है। लेकिन भाग्य रेखा का फीका या कटा होना अशुभ माना जाता है
* मान्यता है कि जिस बिन्दु पर भाग्य रेखा को कोई रेखा काटती है उस वर्ष मनुष्य को भाग्य या धन की हानि होती है।
* अगर भाग्य रेखा जगह-जगह से टूटी हुई हो और शनि पर्वत से मणिबंध तक भी तो भी इसका खास महत्व नहीं होता। टूटी रेखाएं जीवन में भाग्य के समय-समय पर साथ छोड़ देने की निशानी बताएं गए हैं।  MARRIAGE PREDICTION

 

VASHIKARAN-GURU-banner-468-60
 

 

Advertisements

AAJ KA HINDU PANCHANG

NOVEMBER 28, 2015 (SATURDAY) PANCHANGAM

Year: Manmatha (1937)

Ayanam: Dakshinayana

Ritu: Hemant

Week: Saturday

Month: Kartika

Paksha: Krishna Paksha

Tithi: Tritiiya 9:59 pm

Nakshatra: Aardra 1:32 am+

Yoga: Sadhya 11:03 am

Karana: Vanija 10:41 am, Vishti/Bhadra 9:59 pm

Varjya: 10:24 am – 11:55 am

Durmuhurth: 6:27 am – 7:14 am, 7:13 am – 8:00 am

Rahukal: 9:19 am – 10:39 am

Yamaganda: 1:25 pm – 2:53 pm

Amritakaal: 3:44 pm – 5:20 pm

Gulika: 6:29 am – 7:50 am

Sunrise: 6:28 am

Sunset: 5:38 pm

Solar Zodiac: Vrishchika

Lunar Zodiac: Mithuna

300x250(1) (1)

 

AAJ KA PANCHANG

NOVEMBER 27, 2015 (FRIDAY) PANCHANG

Year: Manmatha (1937)

Ayanam: Dakshinayana

Ritu: Hemant

Week: Friday

Month: Kartika

Paksha: Krishna Paksha

Tithi: Dvitiiya 11:29 pm

Nakshatra: Mrigashirsha 2:14 am+

Yoga: Siddha 1:43 pm

Karana: Taitila 12:30 pm, Garaja 11:29 pm

Varjya: 8:50 am – 10:24 am

Durmuhurth: 8:45 am – 9:24 am, 12:22 pm – 1:07 pm

Rahukal: 10:40 am – 12:06 pm

Yamaganda: 2:54 pm – 4:17 pm

Amritakaal: 5:53 pm – 7:24 pm

Gulika: 7:51 am – 9:17 am

Sunrise: 6:28 am

Sunset: 5:38 pm

Solar Zodiac: Vrishchika

Lunar Zodiac: Mithuna 2:50 pm

VASHIKARAN-GURU-banner-468-60

14 NOVEMBER 2015 (SATURDAY) PANCHANG

AAJ KA HINDU PANCHANG hindu panchang by astrology support

Year: Manmatha (1937)

Ayanam: Dakshinayana

Ritu: Hemant

Week: Saturday

Month: Kartika

Paksha: Shukla Paksha

Tithi: Tritiiya 2:26 am+

Nakshatra: Jyeshtha 6:47 pm

Yoga: Sukarman 4:26 am+

Karana: Taitila 2:09 pm, Garaja 2:26 am+

Varjya: Nil

Durmuhurth: 6:23 am – 7:06 am, 7:08 am – 7:50 am

Rahukal: 9:09 am – 10:38 am

Yamaganda: 1:23 pm – 2:51 pm

Amritakaal: 9:28 am – 11:07 am

Gulika: 6:19 am – 7:47 am

Sunrise: 6:21 am

Sunset: 5:39 pm

Solar Zodiac: Tula

Lunar Zodiac: Dhanus 6:47 pm

vashikaran GURU

आज हैं भाई दूज जाने भाई दूज मुहूर्त, पूजा विधि, मान्यता

भाई दूज 2015 happy bhai dooj by astrologysupport.com

भाई दूज, भाई- बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है, जिसे यम द्वितीया या भैया दूज (Bhaiya Dooj) भी कहते हैं। यह हिन्दू धर्म के प्रमुख त्यौहारों में से एक है, जिसे कार्तिक माह की शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है।

Love Problem Solution by Astrology support
भाई दूज 2015 
हिन्दू पंचांग के अनुसार भाई दूज (Bhai Dooj) का त्यौहार, साल 2015 में 13 नवम्बर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा।

भाई दूज मुहूर्त 

इस साल भाई दूज के दिन तिलक लगाने का शुभ समय दिन में 01 बजकर 09 मिनट से लेकर 03 बजकर 16 मिनट तक का है।

Indian Astrology

भाई दूज पूजा विधि

भाई दूज के दिन बहनों को भाई के माथे पर टीका लगा उसकी लंबी उम्र की कामना करनी चाहिए। इस दिन सुबह पहले स्नान करके विष्णु और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। इसके उपरांत भाई को तिलक लगाना चाहिए।

स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन भाई को बहन के घर जाकर भोजन करने का विधान है। अगर बहन की शादी ना हुई हो तो उसके हाथों का बना भोजन करना चाहिए। अपनी सगी बहन न होने पर चाचा, भाई, मामा आदि की पुत्री अथवा पिता की बहन के घर जाकर भोजन करना चाहिए। साथ ही भोजन करने के पश्चात बहन को गहने, वस्त्र आदि उपहार स्वरूप देना चाहिए। इस दिन यमुनाजी में स्नान का विशेष महत्व है।
भाई दूज की मान्यता 

मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल द्वितीय को जो भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं रहता।

Bhadrakali Jyotish Darbar

जाने कौनसी रेखा बताती है आपको सम्मान के साथ पैसा मिलेगा या नहीं

हस्तरेखा एस्ट्रोलॉजीHand Astrology by astrology support

हथेली में सूर्य रेखा बताती है कि व्यक्ति को पैसों के साथ मान-सम्मान मिलेगा या नहीं। सूर्य रेखा अनामिका उंगली (रिंग फिंगर) के ठीक नीचे वाले भाग यानी सूर्य पर्वत पर होती है। सूर्य पर्वत पर जो रेखा खड़ी अवस्था में होती है, वह सूर्य रेखा कहलाती है। यदि किसी व्यक्ति के हाथ में ये रेखा दोष रहित हो तो व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान के साथ ही पैसा भी प्राप्त होता है। ये रेखा सभी लोगों के हाथों में नहीं होती है। यहां जानिए सूर्य रेखा से जुड़ी खास बातें…READ MORE
FREE ASTROLOGY AT ASTROLOGY SUPPORT
FREE ASTROLOGY AT ASTROLOGY SUPPORT
सूर्य रेखा सूर्य पर्वत से हथेली के निचले हिस्से मणिबंध या जीवन रेखा की ओर जाती है। सूर्य रेखा यदि दूसरी रेखाओं से कटी हुई हो या टूटी हुई हो तो इसका शुभ प्रभाव खत्म हो सकता है।
– हथेली में भाग्य रेखा से निकलकर सूर्य रेखा अनामिका उंगली की ओर जाती है तो यह भी शुभ स्थि

Astrology Support
Astrology Support

ति होती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति बहुत नाम और पैसा कमा सकता है।

– यदि किसी व्यक्ति के हाथ में मणिबंध से अनामिका उंगली तक सूर्य रेखा है तो यह बहुत शुभ मानी जाती है। ऐसे लोग जीवन में बहुत कामयाब होते हैं और काफी धन लाभ प्राप्त करते हैं।…READ MORE
FREE INDIAN ASTROLOGY

जाने गोवर्धन पूजा का महत्व

जाने गोवर्धन पूजा का महत्व  –  2015 Govardhan Pooja गोवर्धन पूजा का महत्व

गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है। कथा यह है कि देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था। इन्द्र का अभिमान चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण जो स्वयं लीलाधारी श्री हरि विष्णु के अवतार हैं ने एक लीला रची। प्रभु की इस लीला में यूं हुआ कि एक दिन उन्होंने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे। श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया ” मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं” कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं? मैईया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है। भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए। READ MORE..

FREE ASTROLOGY AT ASTROLOGY SUPPORT

लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगे कि, सब इनका कहा मानने से हुआ है। तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया। इन्द्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी। इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें।READ MORE..

Astrology Support

इन्द्र लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे एहसास हुआ कि उनका मुकाबला करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता अत: वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया। ब्रह्मा जी ने इन्द्र से कहा कि आप जिस कृष्ण की बात कर रहे हैं वह भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं और पूर्ण पुरूषोत्तम नारायण हैं। ब्रह्मा जी के मुंख से यह सुनकर इन्द्र अत्यंत लज्जित हुए और श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा। आप दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल क्षमा करें। इसके पश्चात देवराज इन्द्र ने मुरलीधर की पूजा कर उन्हें भोग लगाया।READ MORE..

FREE INDIAN ASTROLOGY

इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी। बृजवासी इस दिन गोवर्घन पर्वत की पूजा करते हैं। गाय बैल को इस दिन स्नान कराकर उन्हें रंग लगाया जाता है व उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है। गाय और बैलों को गुड़ और चावल मिलाकर खिलाया जाता है।READ MORE..

Astrology Support
Bhadrakali Jyotish Darvar