22 March 2017 Hindu Panchang – astrologysupport.com

Year: Durmukhi (1938) 8 September 2015 Panchang

Ayanam: Uttarayana

Ritu: Vasanta

Week: Wednesday

Month: Phalguna

Paksha: Krishna Paksha

Tithi: Navami 12:18 pm

Nakshatra: P.shadha 2:07 pm

Yoga: Parigha 5:59 am+

Karana: Garaja 12:18 pm, Vanija 12:58 am+

Varjya: 10:40 pm – 12:23 am+

Durmuhurth: 11:58 am – 12:47 pm

Rahukal: 12:23 pm – 1:53 pm

Yamaganda: 7:50 am – 9:21 am

Amritakaal: 8:51 am – 10:37 am

Gulika: 10:52 am – 12:23 pm

Sunrise: 6:19 am

Sunset: 6:26 pm

Solar Zodiac: Mina

Lunar Zodiac: Makara 8:35 pm

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4 March 2017 Hindu Panchang – Astrologysupport.com

Year: Durmukhi (1938) 8 September 2015 Panchang

Ayanam: Uttarayana

Ritu: Vasanta

Week: Saturday

Month: Phalguna

Paksha: Shukla Paksha

Tithi: Shashthi 8:23 am, Saptami 6:07 am+

Nakshatra: Krittika 10:29 pm

Yoga: Vaidhriti 10:09 pm

Karana: Taitila 8:23 am, Garaja 7:14 pm,

Vanija 6:07 am+ Varjya: 11:16 am – 12:46 pm

Durmuhurth: 6:33 am – 7:20 am, 7:20 am – 8:07 am

Rahukal: 9:30 am – 10:59 am

Yamaganda: 1:56 pm – 3:25 pm

Amritakaal: 8:14 pm – 9:44 pm

Gulika: 6:33 am – 8:01 am

Sunrise: 6:33 am

Sunset: 6:22 pm

Solar Zodiac: Kumbha

Lunar Zodiac: Vrishabha 5:39 am

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इस जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा करते समय इन बातों का जरूर ध्यान रखें – Astrologysupport.com

भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में धरती पर आठवां अवतार लिया था. भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी और जन्माष्टमी के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झूलाने की परंपरा भी है.

krishna-janmashtami-poojaकृष्ण जन्माष्टमी पर कैसे करें पूजन
– व्रत की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें.
– सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें.
– व्रत के दिन सुबह स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं.
– इसके बाद जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें:
ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥
– अब शाम के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए ‘सूतिकागृह’ नियत करें.
– इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
– मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अगर ऐसा चित्र मिल जाए तो बेहतर रहता है.
– इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें. पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए.
– फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें-
‘प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः। वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः। सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।’
– अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें.